मंगलवार, 2 अगस्त 2022

75 वर्षों का हमारा सफर

आज़ाद भारत के 75 वर्षों के सफर को सिर्फ शब्दों में बाँध पाना सरल नहीं है. भारत की उपलब्धियाँ बेहद गौरवान्वित करने वाली और तमाम विश्व समुदाय, विशेष रूप से तृतीय विश्व के देशों के लिए प्रेरणादायी हैं. उपनिवेशवाद की एक लंबी शोषणकारी दासता से जब हम 15 अगस्त 1947 को स्वतंत्र हुयेतब हमारी आँखों में सिर्फ एक स्वप्न थाभारत को एक राष्ट्र के रूप स्थापित करने का. स्वतंत्रता अपने साथ विभाजन के गहरे ज़ख़्म, एक त्रासदी लाई थी; समाज अविश्वाससंदेह से भर चुका था. गरीबीआर्थिक पिछड़ापनखाद्यान्न संकट तो हमारी समस्याएं थी हीहम राजनीतिक रूप से भी अपरिपक्व थे. शक्ति के बल पर निर्धारित होता वैश्विक पर्यावरण भी तत्कालीन शक्तिहीन भारत के अनुकूल नहीं था. हमें अपना अस्तित्व बनाये रखने के लिएजीवित रहने के लिए विश्व के देशों से मदद भी चाहिए थी और हम अपनी स्वतंत्रता भी नहीं खोना चाहते थे. हमें बुद्धिमानी के साथ संस्थागत और ढाँचागत विकास के मार्ग पर आगे बढ़ना था; न्यायपालिकाकार्यपालिकाविधायिका और लोकतंत्र की ऐसी मजबूत नींव रखनी थी जिस पर भारत की बुलंद इमारत खड़ी की जा सके.

 

पंडित जवाहरलाल नेहरू के नेतृत्व में नए आज़ाद भारत के सपनों की पहली सरकार ने कार्यभार सँभाला. विभाजन की समस्याओंरियासतों के भारतीय संघ में विलीन होने की समस्याओं से नई सरकार निपट ही रही थी कि कश्मीर पर अधिकार ज़माने की नीयत से पाकिस्तान ने भारत पर आक्रमण कर दिया. तमाम तकनीकी विवशताओं के कारण सही समय पर प्रतिउत्तर नहीं दिया जा सका, परिणामस्वरूप कश्मीर का 13000 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र पाकिस्तान के अवैध कब्जे में चला गया, जिसकी परिणति आज भी हम गुलाम कश्मीर के रूप में देखते हैं. कालांतर में ये स्थितियाँ केन्द्र सरकारों की राजनीतिक अदूरदर्शिता के कारण और भी जटिल हो गयीं. दो देशों का मामला अनावश्यक रूप से सयुंक्त राष्ट्र पहुँच गया और आज तक ना सुलझ सका.

 



अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर भी हमारी समस्याओं का कोई अंत नहीं था. आमदनी का सबसे बड़ा स्रोत कृषि क्षेत्र था जो बदहाल था. पुरानी कृषि प्रविधियोंमानसून पर निर्भरताजोत की समस्याकिसान की ऋणग्रस्तता आदि वे समस्याएं थीं जिनका समाधान खोजे बगैर एक पग भी आगे नहीं बढ़ा जा सकता था. भारत ने अपनी औद्योगिक नीति के तहत, जिसे 'बॉम्बे योजना' के नाम से भी जाना जाता है, के द्वारा एक 'मिश्रित अर्थव्यवस्था' की परिकल्पना की तथा राज्य और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम स्थापित किये गए. पंचवर्षीय योजनाओं की शुरुआत हुई. साठ के दशक में हरित क्रांति के साथ भारत ने खाद्यान्न उत्पादन में एक बडी छलांग मारी. यह दशक चीन के साथ युद्ध औऱ उसमे हमारी पराजय का भी दशक है लेकिन 1962 के युद्ध में हमारी हार ने हमें शक्ति का महत्व समझाया. एक बार धोखा खाने के बाद राजनैतिक आदर्शवाद को यथार्थवाद पर तौला जाने लगा. इसी कालखंड में एक तरफ देश ने मैत्री-धोखे के घाव सहे, हार का दंश भोग तो इसी कालखंड में इसरो (1969) की स्थापना करके देश ने अपनी जीवटता, जिजीविषा को सम्पूर्ण विश्व के सामने प्रदर्शित किया. इससे पूर्व भामा एटॉमिक रिसर्च सेंटर(1954) की स्थापना भी देश की महत्वपूर्ण उपलब्धि रही.

 

भारत अपनी गुटनिरपेक्षता की नीति के कारण गुटों के संघर्ष से स्वयं को बचाने में सफल रहा किंतु हमारी अपनी सुरक्षा चिंताएँ गंभीर थी. पाकिस्तान के सीटोसेंटो जैसे पैक्ट में शामिल हो जाने से शीत युद्ध हमारे दरवाजे तक आ चुका था. 1970 आते-आते भारत अपनी क्षेत्रीय आकांक्षाओं को पूरा करने में सक्षम हो रहा था. 1971 के भारत पाक युद्ध में हमने शानदार विजय हासिल की और पाकिस्तान का विभाजन कर एक नये देश बांग्लादेश को बनाया. देश पर जबरन थोपे गए युद्ध और उसके परिणाम ने यह साबित किया कि हमारी सेनाएँ दक्षिण एशिया में भारतीय हितों की रक्षा करने में समर्थ हैं. इसके बाद 18 मई 1974 को भारत ने पोखरण में परमाणु विस्फोट कर दुनिया को यह दिखा दिया कि हम किसी से कम नहीं.

 

आज़ादी की 75 वर्षीय इस यात्रा में 1990 का दशक भी बेहद महत्वपूर्ण है. इस दशक में हमने तमाम घरेलू विरोधों के बाद भी उदारीकरण और वैश्वीकरण की ओर कदम बढ़ाए, निजीकरण और निवेश की राह चुनी. सार्वजनिक क्षेत्र के प्रतिष्ठानों का विनिवेश आरम्भ कर ढाँचागत विकास के लिए धन एकत्र कियाजिससे निवेश को आकर्षित किया जा सके. सब्सिडी पर नियंत्रण और खर्च में कमी के प्रयास किये गए जिससे अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाया जा सके. इन प्रयासों के सुखद परिणाम हमें आज देखने को मिल रहे हैं. आज देश की जीडीपी 3.12 ट्रिलियन यूएस डॉलर के बराबर है तथा इसके सन 2040 तक 20 ट्रिलियन यूएस डॉलर हो जाने की आशा है. वर्ष 2050 तक चीन के बाद हम दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था होंगे.

 

पिछली यात्रा के साथ मात्र इतना ही नहीं जुड़ा है, बल्कि पिछले 75 वर्षो में हमने बेहद शानदार उपलब्धियाँ हासिल की हैं. शिक्षा, ज्ञानविज्ञान, तकनीक, चिकित्सा, व्यापारखेल, सेनाराजनीति, विदेश नीति, सहित कोई भी क्षेत्र क्यों न रहा हो हमने अनेकानेक उपलब्धियाँ हासिल की हैं. चंद्रयानमंगलयान की सफलताअमेरिका से परमाणु समझौताराकेट और मिसाइल में हमारी क्षमताएँबेखौफ सर्जिकल स्ट्राइक्सकश्मीर से धारा 370 का हटाया जानारूस और अमेरिका दोनों से अपनी शर्तों पर व्यापार करना हमारी बढ़ती हुई शक्ति और राजनीतिक साहस का प्रतीक है.

 

हमने शक्तिहीन से शक्तिशाली बनने में लंबा सफर तय किया. हम एक दृढ़ लोकतंत्र हैं. हमने कोविड काल में अपनी सामर्थ्य का प्रदर्शन किया है. इतनी विशाल आबादी का मुफ्त टीकाकरण कर हमने ये दिखा दिया कि हम संकट में भी दृढ़ता से खड़े रह सकते हैं. विकास दर के 3 प्रतिशत तक आ जाने के बाद भी हम वापस 8 प्रतिशत की स्थिति को प्राप्त कर चुके हैंयह हमारी दृढ़ता का प्रतीक है. निःसंदेह हमने बहुत कुछ अर्जित किया है किंतु अब भी हमें मानव विकास सूचकांकपर्यावरणन्यायिक सुधारोंराजनीतिक सुधारोंवैश्विक नेतृत्ववृहत्तर भूमिकाओंसंघीय ढाँचेसम्प्रदायवादराजनीतिक शुचिता जैसे मुद्दों पर बहुत कार्य करना है. इन पर सकारात्मक कार्य करना अपेक्षित है ताकि हम अपने सपनों के भारत का निर्माण कर सकें.


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