गुरुवार, 29 मई 2025

धर्मान्तरण से राष्ट्रीय अखंडता को खतरा

जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में इस्लामिक आतंकियों द्वारा हिन्दुओं की हत्या के बाद एक तरफ देश में पकिस्तान के खिलाफ, आतंकवादियों के खिलाफ, कट्टर इस्लामिक मंसूबों के खिलाफ माहौल बना हुआ है वहीं दूसरी तरफ इस्लाम के नाम पर धर्मान्तरण करने वाले अपना खेल दिखाने में लगे हुए हैं. पिछले दिनों उत्तर प्रदेश के कानपुर में कुछ मुस्लिमों द्वारा तीन हिन्दू युवतियों और दो हिन्दू युवकों का इस्लाम में धर्मान्तरण कराने का कारनामा अंजाम दिया जा रहा था. इस मामले की जानकारी मिलने पर जब पुलिस द्वारा जाँच की गई तो वहाँ इन पाँच हिन्दुओं को कलमा पढ़ने का अभ्यास करवाते हुए उनको मुसलमान बनाया जा रहा था. देश में धर्मान्तरण को लेकर समय-समय पर न्यायालयों द्वारा टिप्पणी करते हुए निर्णय दिए जाते रहे हैं इसके बाद भी देश भर में चोरी-छिपे धर्मान्तरण का खेल चलता रहता है.

 

धर्मांतरण को लेकर अभी हाल ही में इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा एक फैसला सुनाया गया, जिसमें न्यायालय ने कहा है कि धोखे और दबाव में किया गया धर्मांतरण गैरकानूनी तथा गंभीर अपराध है. ऐसे मामलों में दो पक्षों में समझौते के आधार पर मामले को रद्द नहीं किया जा सकता. न्यायाधीश मंजू रानी चौहान की बेंच ने कहा है कि इस्लाम धर्म में परिवर्तन तभी वास्तविक माना जा सकता है जब कोई बालिग व्यक्ति साफ मन और अपनी इच्छा से पैगंबर हजरत मोहम्मद में विश्वास रखता हो. इस्लाम के सिद्धांतों से प्रभावित होकर उसने सच्चे मन से हृदय परिवर्तन किया हो. न्यायालय ने इन्हीं दलीलों के आधार पर झूठ बोलकर धर्मांतरण कराने और शादी के नाम पर रेप करने के आरोपी को कोई राहत देने से मना कर दिया.

 



इसी तरह एक मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने धर्मान्तरण पर गम्भीर टिप्पणी की थी. एक याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति एम.आर. शाह और न्यायमूर्ति हिमा कोहली की बेंच ने जबरन, लालच, धोखेवश किये गए धर्मपरिवर्तन को अनुच्छेद 14, 21 तथा 25 का उल्लंघन माना. याचिका पर स्पष्टीकरण देते हए सर्वोच्च न्यायालय ने इसे अंतरात्मा की आवाज़ के अधिकार का हनन माना है. न्यायालय ने टिप्पणी की कि जबरन धर्मान्तरण अंततः राष्ट्र की सुरक्षा, धर्म की स्वतंत्रता और नागरिकों की अंतरात्मा को प्रभावित कर सकता है. इस तरह की घटनाएँ न सिर्फ धर्मान्तरित व्यक्ति की धार्मिक स्वतंत्रता का उल्लंघन करती हैं अपितु ये हमारे धर्मनिरपेक्ष ताने-बाने के भी विरुद्ध हैं. सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार को भी उन कदमों की जानकारी देने का निर्देश दिया है जो वे जबरन धर्मपरिवर्तन को रोकने के लिए उठाने जा रहे हैं. ये अनुच्छेद धर्म को मानने, प्रचार करने, अभ्यास करने एवं सभी धर्मों के लोगो को धर्म प्रबंधन की अनुमति सार्वजनिक व्यवस्था, स्वास्थ्य और नैतिकता के नियमों के अधीन रहते हुए प्रदान करता है तथापि ये अनुच्छेद कहीं भी जबरन, धोखे से अथवा लालच देकर धर्मपरिवर्तन की अनुमति नही देते. जबरन धर्मपरिवर्तन का प्रयास आईपीसी धारा 295, 298 के तहत संज्ञेय अपराध है.

 

वास्तव में यह राष्ट्रीय अखंडता को उत्पन्न सबसे गंभीर खतरों में से एक है, जहाँ इस देश के बहुसंख्यक हिंदू समाज को निशाने पर रखते हुए जिहादी शक्तियाँ एवं ईसाई मिशनरियाँ बड़े पैमाने पर धर्मान्तरण करने में लगी हैं. उत्तर-पूर्व के राज्यों में धर्मपरिवर्तन की इस रणनीति के तहत इन क्षेत्रों के धार्मिक समीकरणों में बहुत अंतर आ चुका है. ईसाई आबादी कई जनजातीय राज्यों में बहुसंख्यक हो चुकी है. तमिलनाडु, कर्नाटक के समुद्री बेल्ट में भी इनकी आबादी अप्रत्याशित दर से बढ़ रही है. भारत का हिन्दू समाज मुस्लिम जेहादियों के  निशाने पर भी है. मुस्लिम आबादी इस देश की दूसरी सबसे बड़ी आबादी है और यह आबादी भी धर्मान्तरण के खेल में शामिल है. उत्तर प्रदेश में तो इसके विरुद्ध उत्तर प्रदेश धर्मपरिवर्तन निषेध अध्यादेश 2020 नामक एक कानून भी लाना पड़ा है. जिसकी धारा 3 विवाह द्वारा व्यक्ति के धर्मपरिवर्तन को अवैध घोषित करती है. धर्म का चयन अवश्य ही व्यक्तिगत पसंद का विषय हो सकता है किंतु एक सोची-समझी रणनीति के तहत धर्मान्तरण के षड्यंत्र को भी नकारा नही जा सकता है. यह देश की एकता, अखंडता के लिए बेहद गंभीर चुनौती है. बड़े पैमाने पर इन शक्तियों को विदेशों से धन प्राप्त हो रहा है. जिसका प्रयोग जनजातीय समूहों और गरीब वर्ग को अनेक प्रकार के लालच देकर दूसरे धर्म में परिवर्तित करने का खेल चल रहा है.

 

वर्तमान में देश को धर्मान्तरण पर केन्द्र सरकार को एक सार्थक कदम उठाने की आवश्यकता है. यह निश्चित रूप से यह गंभीर मुद्दा है जो राष्ट्रविरोधी शक्तियों द्वारा धर्म के आधार पर देश को बाँटने के विकल्प के रूप में प्रयोग में लाया जा रहा है. ऐसे में केन्द्र सरकार और राज्य सरकारों को मिलकर काम करना होगा. किसी भी तरह के भ्रम और दुरुपयोग से बचने के लिये सभी राज्यों में एकसमान नियम बनाये जाने चाहिए. शिक्षण संस्थानों के द्वारा शिक्षा और जागरूकता को बढ़ावा दिया जाना चाहिए, इससे भी धर्मांतरण रोकने में महत्वपूर्ण सहायता मिल सकती है. स्पष्ट है कि कानून और जनसहभागिता के समन्वित रूप से ही धर्मान्तरण पर नियन्त्रण सम्भव है. इस ओर न केवल सरकारों को बल्कि सामाजिक संस्थानों, शैक्षणिक संस्थाओं, धार्मिक संस्थाओं, बुद्धिजीवियों आदि को भी सजगता के साथ कार्य करने की आवश्यकता है.

 


सोमवार, 19 मई 2025

सस्ती राजनीति करती कांग्रेस

 ऑपरेशन सिंदूर और सीजफायर के कई दिनों बाद आखिरकार कांग्रेस ने अपना मुंह खोला ही दिया और जैसी उम्मीद थी  वैसी ही सस्ती राजनीति का प्रदर्शन पूरी बेशर्मी के साथ किया। सवाल उठना वाजिब है, पूछे भी जाने चाहिए आखिर आप मुख्य विपक्षी दल हैं। लेकिन कैसे कांग्रेस सीधे सीधे विदेश मंत्री पर इतने घटिया आरोप लगा सकती है कि उन्होंने पहले ही आतंकियों पर हमले की सूचना पाकिस्तान को दे दी। वो कैसे शब्दों को तोड़ मरोड़ कर इतने गंभीर मुद्दे पर ऐसी सस्ती राजनीति पर उतर आए है देखना दुखद है। ये वही लोग हैं जिन्होंने कश्मीर पर पाकिस्तान के कब्जे को बना रहने दिया, आतंकवाद पर हमेशा घुटनाटेक नीति अपनाई जिससे मुस्लिम तुष्टिकरण किया जा सके। न जाने कितनी लाशों पर चुप रहे, यहां तक कि संसद पर हमला होने पर भी मुँह में दही जमा कर बैठे रहे। आज भारत की कार्यवाही से बहुत कष्ट में आ गए है ऐसा किस कारण हो रहा है समझना बहुत कठिन नही है। भारतीय सेना के एसेट्स को कितना नुकसान पहुंचा है यह आपको जानना है कि पाकिस्तान को अपना मुंह बचाने की वजह देनी है ये साफ दिख रहा है। यदि नुकसान हुआ भी है तो यह युद्ध का भाग है और जो बड़े बड़े दावे कर रहे है राफेल मार गिराने के वो खुद ही अपनी तीसमारी के सबूत क्यों नहीं दे देते? एक बार फिर से कांग्रेस सबूत मांगने लगी अपनी सरकार और सेना से। इसी कारण आप सत्ता से बाहर हैं और रहेंगे। बेहतर होता सही समय,सही जगह पर सरकार से वो पूछते जो इस देश के हितों को मजबूत करता।

गुरुवार, 15 मई 2025

परमाणु हमले की धमकी से भारत अब न डरेगा, न रुकेगा

पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने ऑपरेशन सिन्दूर नामक बड़ा अभियान आरंभ किया. इस ऑपरेशन के अंतर्गत पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर और पाकिस्तान के अन्दर स्थित आतंकी ठिकानों पर सीधी सैनिक कार्यवाही की गई. इससे पूर्व की आतंकी घटनाओं की प्रतिक्रिया में भी भारत द्वारा सर्जिकल स्ट्राइक की जा चुकी है. ऑपरेशन सिन्दूर उस बदले हुए भारत की प्रतिक्रिया से भी कई कदम आगे की कार्यवाही सिद्ध हुई. आतंकवाद से जूझ रहे भारत के लिए पहलगाम हमला कश्मीर में आ रहे बदलावों को रोकने और आतंक की खिसकती ज़मीन को फिर से मजबूत करने के उद्देश्य से किया गया. आतंकियों ने जिस तरह से धर्म पूछ कर हत्याएँ की, उसके पीछे की साजिश देश में हिन्दू-मुस्लिम दंगे भड़काने की थी. इस आतंकी हमले के बाद देश में आक्रोश पनप रहा था किन्तु भारत सरकार ने हड़बड़ाहट नहीं दिखाई किन्तु देशवासियों को यह भरोसा अवश्य दिलाया कि दोषी बख्शे नहीं जाएँगे. प्रधानमंत्री के वक्तव्य के बाद यह विश्वास तो पक्का हो गया था कि आतंकियों को जवाब ज़रूर दिया जाएगा.

 

7 मई 2025 की रात को भारत ने ऑपरेशन सिन्दूर के द्वारा जवाबी कार्यवाही शुरू की जिसकी भनक किसी को न लगी. भारत द्वारा पाकिस्तान के अंदर स्थित आतंकियों के ठिकानों पर मिसाइल हमला करके उन्हें तबाह कर दिया गया. ऐसा पहली बार हुआ कि भारत ने पाकिस्तान के अन्दर स्थित आतंकी ठिकानों पर इतनी आक्रामक, सधी हुई कार्यवाही की और पाकिस्तान एक भी हमले को रोक नहीं सका. इतनी अचूक, अप्रत्याशित कार्यवाही से बौखलाए पाकिस्तान ने जम्मू, पंजाब, राजस्थान, चंडीगढ़ आदि स्थानों पर ड्रोन और मिसाइल हमले करने का प्रयास किया लेकिन भारतीय वायु सेना, एयर डिफेंस सिस्टम ने एक भी हमला सफल नहीं होने दिया. पाकिस्तान के सभी ड्रोन, मिसाइल को हवा में ही मार गिराया गया. इधर भारतीय वायु सेना ने सम्पूर्ण नभ प्रभुत्व स्थापित कर दुनिया को आश्चर्यचकित कर दिया उधर नौ सेना ने भी अरब सागर की नाकेबंदी करके सभी प्रकार के पोतों के आवागमन को प्रतिबंधित कर सागर पर वर्चस्व स्थापित किया.

 



इस ऑपरेशन के दौरान और उसके पहले भी अनेक अवसरों पर पाकिस्तान द्वारा परमाणु हमले की धमकी दी जाती रही है, जिससे भारत को किसी भी सीधी कार्यवाही से रोका जा सके. पाकिस्तान को यह तथ्य भली प्रकार से ज्ञात है कि आमने सामने की लड़ाई में उसकी सैन्य क्षमता भारतीय सैन्य क्षमता के सामने टिक नहीं सकेगी. इस बार भारत ने अपनी तीनों सेनाओं के संयुक्त और सशक्त मोर्चे के चलते पाकिस्तान की परमाणु हमले करने की धमकी को ही उदासीन करने के उद्देश्य से अगला हमला उसके महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों पर किया. कई प्रमुख सैन्य ठिकानों पर किये गए हमले में एक हमला कांधार के निकट एयरबेस पर किया गया, जिसे पाकिस्तान की एटमी कमान माना जाता है. विश्व में यह पहला अवसर था जबकि किसी परमाणु शक्ति ने दूसरी परमाणु शक्ति की एटमी कमान पर सीधा हमला कर दिया हो. भारतीय सेना द्वारा किये गए तमाम सारे हमलों में से एक को भी पाकिस्तान द्वारा रोका नहीं जा सका. इस स्थिति ने दुनिया भर के सामने उसकी सैन्य क्षमता, सुरक्षा व्यवस्था, एयर डिफेन्स सिस्टम की पोल खोल कर रख दी. पाकिस्तान द्वारा बार-बार दी जाने वाली परमाणु बम की धमकी, आतंकियों के सहारे चल रही उसकी खोखली सैन्य ताकत सबके सामने नग्न हो चुकी है.

 

इस हमले के पश्चात पाकिस्तान ने पूरी दुनिया से बीच-बचाव किये जाने की गुहार लगाना आरंभ कर दिया. अमेरिका भी भारत से सैन्य कार्यवाही को रोकने का आग्रह करने लगा. अचानक 10 मई को भारत अपनी शर्तों पर सीजफायर के लिए तैयार हो गया और इसकी घोषणा कर दी गई. इस युद्ध-विराम की घोषणा से भारतीय जनमानस को घोर निराशा हुई क्योंकि वे सभी इसका उचित कारण नहीं समझ पा रहे थे. यह सोच भी उचित थी कि क्यों अचानक से इस युद्ध-विराम को लागू कर दिया गया जबकि हम पूरी तरह से हावी थे? लोगों के मन में सवाल उठने लगा कि क्या भारतीय नेतृत्व अमेरिका के समक्ष झुक गया या फिर से एक बार पाकिस्तान अपनी चाल में कामयाब हो गया? इन प्रश्नों के उत्तर उस समय मिलने शुरू हुए जबकि पाकिस्तान में रेडियोएक्टिव विकिरण की खबरों का, परमाणु ऊर्जा आयोग की अचानक सक्रियता का शुरू होना सामने आया. यद्यपि भारत और पाकिस्तान की तरफ से परमाणु शस्त्रों से विकिरण न होने, किसी परमाणु ठिकाने पर हमला न होने के दावे किये जाते रहे मगर पाकिस्तान में, किराना हिल्स पर जिस तरह की गतिविधियाँ नजर आईं उनसे परमाणु विकिरण होने की सम्भावना से इंकार नहीं किया जा सकता है. पाकिस्तान में तीन दिनों में तीन भूकंपों का आना, मिस्र की वायु सेना के एक मालवाहक विमान का बोरोन लेकर वहाँ उतरने का अनुमान, रेडियो-एक्टिव गतिविधियों की जाँच के नाम पर अमेरिका के न्यूक्लियर सेफ्टी सपोर्ट एयरक्राफ्ट का उस क्षेत्र में भेजा जाना रिसाव होने की आशंका को न केवल बढ़ाता है बल्कि पुष्ट भी करता है.  

 

सम्भव है कि भारत ने रेडियोएक्टिव रिसाव सम्बन्धी घटना होने के कारण संयम दिखाते हुए युद्ध-विराम पर अपनी सहमति दी. यह भी मानवता पर, पर्यावरण पर भारत का संवेदनशील नजरिया है. बहरहाल, विकिरण सम्बन्धी रिसाव पर अंतिम निष्कर्ष पर्याप्त जाँच के बाद ही सामने आ सकेगा किन्तु यह स्पष्ट हुआ है कि भारत अब किसी भी तरह की बन्दर-घुड़की से डरने वाला नहीं है, आतंकियों के विरुद्ध कार्यवाही करने से रुकने वाला नहीं है. युद्ध-विराम के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के वक्तव्य ने भी तस्वीर साफ कर दी. ऑपरेशन सिन्दूर खत्म नहीं हुआ है, यह जारी रहेगा; परमाणु ब्लैकमेल को न सहने की उक्ति उनका इशारा समझने के लिए पर्याप्त है.

शनिवार, 10 मई 2025

संघर्ष विराम, जीती हुई बाजी फिर गए हार

 भारत पाकिस्तान के बीच फिलहाल संघर्ष विराम लागू हो गया। भारतीय मीडिया इसे ही भारत की जीत साबित करने पर उतारू है। थोड़े ही दिन बाद से सरकार के गुणगान सुना सुना कर मीडिया कान पका देगी और मूल विषय हमेशा की तरह नेपथ्य में चल जाएगा। आखिर इन सबसे हासिल क्या हुआ? क्या अब भारत पर कोई आतंकवादी हमला नहीं होगा? क्या युद्ध हिस्टीरिया राजनीतिक लाभ के लिए खड़ा किया गया? क्यों जब भारतीय वायु सेना और नेवी ने प्रभुत्व हासिल कर लिया तो थल सेना के कदम बढाने से पहले ही संघर्ष विराम लागू कर लिया गया? क्यों भारत अमेरिकी दबाव में आया और कदम पीछे हटा लिए? युद्ध विराम की इतनी हड़बड़ाहट क्यों थी?

इन सवालों के कोई जवाब कभी नहीं दिए जाएंगे मुनीर, पाक की नीति, आतंकवाद, यहां तक कि सिंधु में पानी सब कुछ वैसा का वैसा ही है। राजनीतिक् नेतृत्व जो अमेरिका के समक्ष झुक गया ये क्यों नहीं पूछ सका कि जब IMF पाकिस्तान को पैसा देने से पीछे नही हट रहा तो हम पर यह बेजा दबाव क्यों बनाया जा रहा? कम से कम IMF से मिले पैसे को तो खर्च करवा ही लेना चाहिए था। आखिर जीतने वाले को विराम की इतनी हड़बड़ी क्यों थी? क्या अंतर है पिछली तथाकथित कायर और इस सरकार में। आखिर किया तो आपने भी वही। कब तक हम खून को स्याही से हराते रहेंगे?

कब तक हम अदना से पाकिस्तान की लिखी स्क्रिप्ट पर कठपुतलियों की तरह नाचते रहेंगे????

शुक्रवार, 9 मई 2025

पहलगाम से आगे

 पहलगाम हमले का जवाब जिस तरह से हमारी सेना ने दिया है पाकिस्तान पूरी तरह से नगां हो चुका है। दशकों तक बातों के बिगुल फूंक फूंक के जिस तरह से पाकिस्तान की सत्ता और सेना के गठजोड़ ने अपनी जनता को मूर्ख बनाया है उसका ही परिणाम आज वो भुगत रहे हैं। दरअसल एक कमज़ोर देश जो सांस्थानिक विकास भी न कर सका कभी भी मजबूत सैन्य ताकत नहीं हो सकता। आजतक वो हमें घाव देने की हिमाकत इस कारण करता रहा क्योंकि जैसा जवाब दिया जाना चाहिए था वो नहीं दिया गया। अपनी लड़ाई खुद लड़नी होती है ये बात भारतीय राजनीति को अब समझ आई है। आज जिस तरह से जल, थल, वायु, सायबर स्पेस, राजनीति, कूटनीति, इक्षाशक्ति और जनसमर्थन एक होकर अपने दुश्मन के खिलाफ कार्यवाही कर रहा है दुनिया देख रही है। देश के अंदर, देश के बाहर, हमारे रंग बदलते पड़ोसी जो पाकिस्तान के दम पर भारत विरोध में सक्रिय है आज भारत का ये रूप देख कर निश्चित रूप से सकते में है। दो कौड़ी का वर्तमान बंगलादेशी नेतृत्व नार्थ ईस्ट को भारत से अलग करने का सपना देख रहा है, वो भी अब नींद से जागेंगे ऐसी उम्मीद की जा सकती है। चीन की दम पर पाकिस्तान ने भारत से उलझ कर अपनी गति करवा रहा है और जो पाकिस्तान के दम पर फुदक रहे हैं उन्हें उनकी बुद्धि को क्या जा सकता है? भारत को भी निर्णायक अंत तक पहुंचे बगैर रुकना नहीं चाहिए। हम पर थोपी गई इस जंग को हम हमेशा के लिए खत्म कर दें इस प्रण के साथ ही आगे बढ़ना चाहिए।


फिर इम्तिहान न होगा

यूं इम्तिहान देंगे..


मिट जाएंगे जुबां पर अपनी

जब हम जुबां देंगे


है इसी में शान अपनी 

इस शान की कसम


हिंदुस्तान की कसम...