रविवार, 8 जनवरी 2023

धर्मान्तरण पर छिड़ी बहस

हाल में ही सर्वोच्च न्यायालय ने धर्मान्तरण के मुद्दे पर अपनी टिप्पणी देकर इसे बड़ी बहस का मुद्दा बना दिया है. एक याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति एम. आर. शाह और न्यायमूर्ति हिमा कोहली की बेंच ने जबरन, लालच, धोखेवश किये गए धर्मपरिवर्तन को अनुच्छेद 14, 21 तथा 25 का उल्लंघन माना है. याचिका पर स्पष्टीकरण देते हए सर्वोच्च न्यायालय ने इसे अंतरात्मा की आवाज़ के अधिकार का हनन माना है. सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी की है कि "जबरन धर्मान्तरण अंततः राष्ट्र की सुरक्षा, धर्म की स्वतंत्रता और नागरिकों की अंतरात्मा को प्रभावित कर सकता है.” इस तरह की घटनाएँ न सिर्फ धर्मान्तरित व्यक्ति की धार्मिक स्वतंत्रता का उल्लंघन करतीं हैं अपितु ये हमारे धर्मनिरपेक्ष ताने-बाने के भी विरुद्ध हैं.


सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार को भी उन कदमों की जानकारी देने का निर्देश दिया है जो वे जबरन धर्मपरिवर्तन को रोकने के लिए उठाने जा रहे हैं. न्यायालय का वर्तमान रुख़ उन लोगों को निराश करने वाला है जो धर्मान्तरण के इस षड्यंत्र को राइट ऑफ चॉइस मानते हुए अनुच्छेद 21 तथा 25 में दिए गए धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार से जोड़ते हैं. यद्यपि ये अनुच्छेद धर्म को मानने, प्रचार करने, अभ्यास करने एवं सभी धर्मों के लोगो को धर्म प्रबंधन की अनुमति सार्वजनिक व्यवस्था, स्वास्थ्य और नैतिकता के नियमों के अधीन रहते हुए प्रदान करता है तथापि ये अनुच्छेद कहीं भी जबरन, धोखे से अथवा लालच देकर धर्मपरिवर्तन की अनुमति नही देते. जबरन धर्मपरिवर्तन का प्रयास आईपीसी धारा 295, 298 के तहत संज्ञेय अपराध है. कई राज्यों में धर्मान्तरण विरोधी कानून अस्तित्व में हैं. 1956 के नियोमी आयोग एवं वाधवा आयोग 2000 ने धर्मान्तरण की समस्या को उठाया था. वर्ष 2006 में श्री लाल कृष्ण आडवाणी द्वारा भी धर्मान्तरण को हिन्दू समाज और राष्ट्रीय एकता के विरुद्ध गंभीर खतरा बताया गया था.




वास्तव में यह राष्ट्रीय अखंडता को उत्पन्न सबसे गंभीर खतरों में से एक है, जहाँ इस देश के बहुसंख्यक हिंदू समाज को निशाने पर रखते हुए जिहादी शक्तियां एवं ईसाई मिशनरियां बड़े पैमाने पर धर्मान्तरण करने में लगी हैं. इनके लक्ष्य समान हैं, जनजातीय आबादी तथा समाज पिछड़े तबकों को हिन्दू समाज से काटना. ईसाई मिशनरियां न्यू क्रिश्चियन इकनोमिक थ्योरी के तहत अश्वेत समाज को ईसाई बनाने के मिशन पर कार्य करती हैं. उत्तर-पूर्व के राज्यों में धर्मपरिवर्तन की इस रणनीति के तहत इन क्षेत्रों के धार्मिक समीकरणों में बहुत अंतर आ चुका है. ईसाई आबादी कई जनजातीय राज्यों में बहुसंख्यक हो चुकी है. तमिलनाडुकर्नाटक के समुद्री बेल्ट में भी इनकी आबादी अप्रत्याशित दर से बढ़ रही है. वर्ष 2011 में सेंटर फॉर पॉलिसी स्टडीज ने चौकाने वाले जनसांख्यकिक आँकड़े दिए, जिसके अनुसार मिज़ोरम, मणिपुर तथा नागालैंड अधिकांश जनजातीय आबादी ईसाई हो चुकी है. सन 1911 तक मिज़ोरम में ईसाई जनसंख्या 3 प्रतिशत से भी कम थी, जो सन 2011 में 90 प्रतिशत हो गई. मणिपुर में सन 1951 तक यह 12 प्रतिशत थी जो सन 2011 तक 41 प्रतिशत हो गई. मेघालय में यह 75 प्रतिशत हो चुकी है. इसी तरह कुछ ईसाई मिशनरियां केरल, कर्नाटक,  गोआ, महाराष्ट्र और तमिलनाडु में भी धर्मान्तरण में संलिप्त हैं.


मिशनरियों के अलावा भारत का हिन्दू समाज मुस्लिम जेहादियों के निशाने पर भी है. मुस्लिम आबादी इस देश की दूसरी सबसे बड़ी आबादी है और यह आबादी भी धर्मान्तरण के खेल में शामिल है. हाल के कुछ वर्षों में विवाह द्वारा धर्मपरिवर्तन करवाने की अनेक घटनाएं सामने आई हैंजिन्हें लव जिहाद के नाम से जाना जा रहा है. उत्तर प्रदेश में तो इसके विरुद्ध उत्तर प्रदेश धर्मपरिवर्तन निषेध अध्यादेश 2020 नामक एक कानून भी लाना पड़ा है. जिसकी धारा विवाह द्वारा व्यक्ति के धर्मपरिवर्तन को अवैध घोषित करती है. धर्म का चयन अवश्य ही व्यक्तिगत पसंद का विषय हो सकता है किंतु एक सोची-समझी रणनीति के तहत धर्मान्तरण के षड्यंत्र को भी नकारा नही जा सकता है. यह देश की एकता, अखंडता के लिए बेहद गंभीर चुनौती है. बड़े पैमाने पर इन शक्तियों को विदेशों से धन प्राप्त हो रहा है. जिसका प्रयोग जनजातीय समूहों और गरीब वर्ग को अनेक प्रकार के लालच देकर दूसरे धर्म में परिवर्तित करने का खेल चल रहा है.


सुप्रीम कोर्ट ने भी स्पष्ट किया है कि कई बार धर्मान्तरित होने वाले को भी यह नहीं पता कि उसके साथ क्या हो रहा है. इस बहस ने लोगों का ध्यान इस मुद्दे की ओर खींचा है. वर्तमान में देश को धर्मान्तरण पर एक सार्थक बहस की आवश्यकता भी है, जिससे इस बारे में एक जनमत तैयार हो सके. केंद्र सरकार भविष्य में क्या इसके विरुद्ध कोई ठोस प्रयास कर पायेगी, ये तो समय बतायेगा किंतु निश्चित रूप से यह गंभीर मुद्दा है जो राष्ट्रविरोधी शक्तियों द्वारा धर्म के आधार पर देश को बाँटने के विकल्प के रूप में प्रयोग में लाया जा रहा है.