हमास को हारना ही चाहिए भले इसकी कीमत कुछ भी हो....
विगत कुछ दिनों से मीडिया में फिलिस्तीन का रोना रोया जा रहा है, गाज़ा मर रहा है, गाज़ा का दम घुट रहा है,तो क्या गाज़ा खत्म हो जाएगा आदि आदि...
बंधकों को छोड़ने को लेकर हमास को महान साबित करने का प्रयास किया जा रहा है। अब सोचने की बात ये है कि अचानक से मीडिया हमास और फिलिस्तीनी आतंकियों के पक्ष में माहौल क्यों बना रहा है, क्यों अचानक से गाज़ा के लोगों को निर्दोष और बेगुनाह साबित करने का प्रयास किया जा रहा है? क्यों ये भुलाने की कोशिश की जा रही है कि इस्राइल आक्रमणकारी नहीं है इस बार,वो अपने ऊपर किये गए बर्बर हमले का जवाब दे रहा है,जो उसका अधिकार है।
बंधको को हमास जिस तरह से ईंधन प्राप्त करने के लिए प्रयोग कर रहा है वो दिखाता है कि उन्हें कोई मानवीय सहायता नहीं, युद्ध के उद्देश्य से ईंधन चाहिए जिससे वो अपने हमले जारी रख सकें। जब हमास को ही गाज़ा के नागरिकों की कीमत पर युद्ध मशीन को चलाते रहने को तेल चाहिए तो पूरी दुनिया ये एकतरफा चिल्लपों क्यों कर रही है? ये युद्ध है विनाश होगा,लोग मरेंगे, ये आतंकी हमले से पहले सोचना चाहिए था।अब जब इस्राइल हावी होता दिख रहा है तो हमास और उसको सपोर्ट करने वाले सारे इस्लामिक देश हर कूटनीतिक दावं अपना रहे, बंधकों का सौदा भी उसका ही एक हिस्सा है। दुनिया की भलाई इसमे ही है कि हमास को कुचल दिया जाए चाहे इसकी कीमत कुछ भी हो,कुछ भी।
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