शुक्रवार, 27 जून 2025

विश्वयुद्ध का खतरा और सीजफायर का भविष्य

ईरान और इजराइल में भले ही सीजफायर हो गया हो मगर एक समय इस युद्ध से विश्वयुद्ध का खतरा नजर आया था. ईरान के परमाणु कार्यक्रम को समाप्त करने की अपनी जिद के चलते इज़राइल ने ईरान पर हवाई हमले कर दिए. नेतन्याहू स्पष्ट रूप से कह चुके थे कि वे लक्ष्य को प्राप्त किये बगैर रुकने वाले नहीं हैं. अपनी इसी जिद के चलते इज़राइल पूरी ताकत से ईरान की सैन्य ताकत और परमाणु क्षमता को तबाह करने पर आमादा रहा. ऐसी स्थिति में ईरान भी खामोश होकर नहीं बैठा बल्कि उसने भी पूरी तीव्रता से इजराइल पर पलटवार किये. ईरान के जोरदार हमलों से इज़राइल को काफी नुकसान हुआ. उसकी वायु रक्षा प्रणाली ईरान की बैलिस्टिक मिसाइल का सामना नहीं कर पाई. उसके द्वारा दागी गई हायपरसोनिक मिसाइलों ने तेलअबीव में भयानक तबाही मचाई. आयरन डोम और सभी प्रतिरक्षा प्रणालियों को ध्वस्त कर ईरान द्वारा इज़राइल पर कुछ सफल हमले किये गए. उसके द्वारा किये गए ताबड़तोड़ बैलिस्टिक मिसाइल हमलों में इज़राइली बस्तियाँ, शहर, अस्पताल आदि निशाने पर रहे. अपने हमलों में उसने सैनिक, असैनिक लक्ष्यों में कोई भेद नहीं किया.

 

युद्ध की इस स्थिति में अमेरिका के असमंजस भरे रुख को देखकर शंका हो रही थी कि कहीं इजराइल ने ईरान पर हमला करके गलती तो न कर दी? ऐसा इसलिए क्योंकि इजराइल पश्चिम एशिया और मध्य पूर्व में अमेरिका भूराजनीति का आधार है, ऐसे में उसे विश्वास था कि ईरान के साथ युद्ध की स्थिति में अमेरिका उसका खुलकर साथ देगा. इस विपत्ति काल में अमेरिका अविश्वसनीय नजर आ रहा था. ईरान पर समझौता करने का दबाव बनाते ट्रम्प अपनी नीति से पूरी तरह से पलटते दिखाई दिए. अमेरिका के खुलकर युद्ध में उतरने को लेकर भी दूरी बनाते नजर आये. ईरान की बढती ताकत के बीच अमरीका पर विश्वास करके इज़राइल बेहद असहज स्थिति में फँसा नजर आ रहा था. ऐसा महसूस हुआ कि इस बार ईरान की ताकत को समझने और युद्ध करने के इजराइल के निर्णय में कुछ खामी रह गई. इज़राइल के आयरन डोम के असफल होने के बाद उसके व्यापारिक, औद्योगिक केन्द्र ईरान के निशाने पर रहे, जिसके सामरिक लाभ के साथ-साथ वृहद स्ट्रैटिजिक अर्थ भी थे. अर्थव्यवस्था पर चोट इज़राइल की यौद्धिक क्षमता तोड़ कर रख देगी और माइक्रोसॉफ्ट ऑफिस पर हमला इसका ही उदाहरण था.

 

शंका से भरे ऐसे वातावरण में अमेरिका ने ऑपरेशन मिडनाइट हैमर के द्वारा ईरान के तीन परमाणु ठिकानों- फोर्दो, नतांज और इस्फहान पर हमला कर दिया. इस हमले में 125 एयरक्राफ्ट, सात बी-2 स्टील्थ बॉम्बर्स के द्वारा ईरान के परमाणु ठिकानों पर 13,608 किलो वजनी बस्टर बम गिराए गए. युद्ध में शामिल होने के बाद भी अमेरिका ने कहा कि वह ईरान से युद्ध नहीं चाहता है मगर यदि इस हमले का पलटवार ईरान द्वारा किया गया तो उसके परिणाम बहुत बुरे होंगे. अमेरिका द्वारा ईरान के परमाणु संयत्रों पर हमला करने के बाद इस तरह की धमकी भरे अंदाज में बयान देने के बाद ऐसा माना जा रहा था कि ईरान इसका जवाब नहीं देगा किन्तु जिस तरह से कतर, इराक, कुवैत पर उसने मिसाइलें दागी, उससे ईरान ने दुनिया को दिखा दिया कि वह अमेरिका की धमकी या उसकी दबंगई से डरने वाला नहीं है. इसे अमेरिका की धमकी कहा जाये या फिर नसीहत, ईरान ने उसे मानने से इंकार करते हुए कतर के अमेरिकी बेस पर सीधा हमला कर दिया. यह एक तरह से जहाँ अमेरिका की धमकी को नजरंदाज करना था वहीं अमेरिका को खुली चुनौती देना भी था.

 

ईरान के इस पलटवार से मध्य पूर्व के देशों तक युद्ध की आग फैलने की आशंका बढ़ गई थी. मध्य पूर्व के देशों में अमेरिका के एक दर्जन से भी अधिक अड्डे हैं जिनकी सुरक्षा खतरे में आ चुकी थी. चूँकि ईरान किसी भी स्थिति में अमेरिका की ज़मीन पर हमला नहीं कर सकता, इस कारण उसके द्वारा मध्य पूर्व के अमेरिकी अड्डों को निशाना बनाया गया. ईरान के इस पलटवार के पीछे आत्मघाती कदम की आहट भी सुनाई दी. यदि इस पलटवार पर अमेरिका आक्रोशित हो गया तो कहीं ये हमला ईरान के लिए पर्ल हार्बर हमले की तरह आत्मघाती सिद्ध न हो जाये. पर्ल हार्बर पर जापान के हमले का बदला लेने के लिए अमेरिका ने जापान पर परमाणु बम गिरा दिया था. जिसका दुष्परिणाम जापान आज तक भुगत रहा है. फ़िलहाल तो ईरान के इस पलटवार के बाद भी अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प द्वारा इजराइल-ईरान में सीजफायर होने की घोषणा सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म द्वारा की गई, जिसको पहले तो ईरान द्वारा नकारा गया किन्तु बाद में ईरान और इजराइल इस युद्धविराम पर राज़ी हो गए.

 

इस स्थिति के बाद भी समय अनिश्चितता का है, संशय का है. ऐसे में भविष्य ही तय करेगा कि कल क्या होगा? दरअसल इस युद्ध के केन्द्र में ईरान का परमाणु कार्यक्रम रहा. अब जबकि फोर्दो परमाणु संयंत्र अमेरिकी हमले के कारण पूरी तरह से बर्बाद हो गया है मगर ऐसा अंदेशा लगाया जा रहा है कि ईरान ने हमले से पहले ही संवर्द्धित यूरेनियम को किसी दूसरे स्थान पर स्थानांतरित कर दिया है. यदि यह अंदेशा सत्य हुआ तो जहाँ अमेरिका के हमले का उद्देश्य पूरा नहीं हो सका वहीं ईरान का परमाणु कार्यक्रम अभी जिंदा बना हुआ है. यह संवर्धित यूरेनियम ही ईरान को परमाणु बम तक ले जा सकता है. इसके साथ ही अमेरिका की अविश्वसनीयता किसी से भी छिपी नहीं है, ऐसे में कल को अमेरिका का ही रुख क्या होगा, ये भी समय की मुट्ठी में है. अब समय ही तय करेगा कि ईरान-इजराइल सीजफायर का वास्तविक भविष्य क्या है.


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