तकनीक के नए आसमान पर युद्ध
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मंगलवार को अचानक एक अनोखी खबर सामने आती है कि लेबनान और सीरिया में पेजर फटने लगे। लगभग 2000 घटनाएं पेजर ब्लास्ट की हुई जिसके बाद यह तय करना मुश्किल नहीं था कि यह कोई दुर्घटना नहीं बल्कि सोचा-समझा हमला था। शक की सुई इज़राइल पर जा टिकी जो बाद में सही साबित हुई। इस घटना ने जहां हिज़्बुल्लाह के लड़ाकों को निशाना बनाया उनके 450 लड़ाके अपनी आंखें खो बैठे, घायल हुए,चेहरे और पेट पर गहरी चोटें आई, कुछ मौतें भी हुई लेकिन इन सब से ऊपर जो इसका मनोवैज्ञानिक प्रभाव हुआ वो शब्दों से परे है। जरा सोचिए उस दहशत भरे माहौल को जिससे लेबनान और सीरिया के इलाकों में भगदड़ सी मची है इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसेस को बाहर फेकने की। हिजबुल्ला की कार्य शक्ति अस्पतालों में पड़ी है, संचार और पुर्नगठन का अब क्या तरीका हो समझ नही आ रहा, अगला हमला कब,कैसे, कहाँ होगा पागलो की तरह कयास लगाते रहो। ये बदहवासी इस्राइल की शानदार युद्ध रणनीति की बस एक झलक है। जरा सोचिये रणनीति की इस सफलता को जिसमें खेल का मैदान और नीति दोनों ही इस्राइल की तय की हुई हैं। जब हिजबुल्लाह ने साइबर अटैक के डर से मोबाइल की जगह पेजर को संचार के लिए प्रयोग करने की सोची होगी तो लगा होगा कि बना दिया... इस्राइल को। तू डाल डाल तो मैं पात पात की तरह इस्राइल ने न सिर्फ हिजबुल्लाह की आपूर्ति श्रृंखला को छेद दिया बल्कि 5000 से अधिक पेजरों में आई ई डी लगा दी और माकूल समय पर दुश्मन के हौसले पर जबरदस्त धमाका किया। इस्राइल के एक प्रवक्ता ने इशारा किया कि जो चरण सामने दिख रहा है उससे भी कई चरण आगे का काम हो चुका है। वाकी टाकी, रेडियो, टी वी, राउटर, फ्रिज, वाशिंग मशीन कुछ भी फट सकता है। शायद बल्ब और पंखे भी खैर ये तो मज़ाक की बात है लेकिन हिजबुल्लाह के साथ जो हुआ वो बिल्कुल मज़ाक नहीं था। यह तकनीक और रणनीति का बेहतरीन प्रयोग है जो दुश्मन का मनोबल तोड़ देगा। उन्हें संचार विहीन कर के संगठित नही होने देगा। हिज़्बुल्लाह हमले ज़रूर कर सकता है पर इस्राइल की तरह तकनीक नही पा सकता। बिना कम्युनिकेशन के कैसे खड़ी होंगी हिज़्बुल्लाह की आतंकी फौज? युद्ध तो बढेगा ही,लेकिन फिलहाल तो इस्राइल की सोच ज़ेहन में उतारने लायक है, मैदान भी हमारा होगा और खेल भी।
19.09.24
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