'Let's bleed India by thousand cuts' को अपना मिशन मानने वाली पाकिस्तानी सत्ता और फौज के गठजोड़ का भारत द्वारा जो राजनयिक प्रतिक्रिया आज दी गई उससे बिगड़ क्या जाएगा? सिंधु जल समझौता, भारतीय वीजा,भारत के साथ दौत्य संबंध यदि पाकिस्तान के लिए इतने ही महत्वपूर्ण होते तो भारत पाकिस्तान संबंध इतने बदशक्ल न होते। पाकिस्तान का निर्माण ही भारत या हिंदुत्व के विरोध पर हुआ है।
पाकिस्तान का कोई राष्ट्रीय चरित्र मज़हब से अलग करके उकेरना असंभव है। पाकिस्तान एक जिहादी मुस्लिम,आतंकी राष्ट्र है,हम हिन्दू बहुल होने के नाते उसके दुश्मन थे और रहेंगे। इस सत्य को स्वीकार कर आगे बढ़ने की आवशयक्ता है। पाकिस्तान की सत्ता कभी भी इस जिहादी चरित्र को नहीं छोड़ सकती। अब ऐसी मानसिकता वाले आतंकी देश से डील करते समय राजनयिक रास्ते व्यर्थ हैं। यदि कश्मीर पाकिस्तान को नहीं दिया जा सकता, यदि भारत को शरिया कानून में नहीं लाया जा सकता, यदि देश की बहुसंख्यक हिन्दू आबादी को जीने का अधिकार है तो पाकिस्तान से डील करने का तरीका वही होना चाहिए जो इस्राइल ने फिलिस्तीन,हमास के लिए अपना रखा है।
1 के बदले 100 मारो, बरसाओ शहरों पर मिसाइलें, धूल में मिला दो बस्तियों को। कोई कानून एकतरफा मानने की आवश्यकता नहीं है। जिस दिन इन जिहादियों की लाशों से सड़के पटने लगेगी खुद ही बिलबिला के अपने नेताओं और फौजियों को मारेंगे। कोई बात नहीं, खून का बदला सिर्फ खून होगा है ये सबक हर पाकिस्तानी के ज़ेहन में चिपकाने का वक़्त आ चुका है।
23.04.2025
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