भारत पाकिस्तान के बीच फिलहाल संघर्ष विराम लागू हो गया। भारतीय मीडिया इसे ही भारत की जीत साबित करने पर उतारू है। थोड़े ही दिन बाद से सरकार के गुणगान सुना सुना कर मीडिया कान पका देगी और मूल विषय हमेशा की तरह नेपथ्य में चल जाएगा। आखिर इन सबसे हासिल क्या हुआ? क्या अब भारत पर कोई आतंकवादी हमला नहीं होगा? क्या युद्ध हिस्टीरिया राजनीतिक लाभ के लिए खड़ा किया गया? क्यों जब भारतीय वायु सेना और नेवी ने प्रभुत्व हासिल कर लिया तो थल सेना के कदम बढाने से पहले ही संघर्ष विराम लागू कर लिया गया? क्यों भारत अमेरिकी दबाव में आया और कदम पीछे हटा लिए? युद्ध विराम की इतनी हड़बड़ाहट क्यों थी?
इन सवालों के कोई जवाब कभी नहीं दिए जाएंगे मुनीर, पाक की नीति, आतंकवाद, यहां तक कि सिंधु में पानी सब कुछ वैसा का वैसा ही है। राजनीतिक् नेतृत्व जो अमेरिका के समक्ष झुक गया ये क्यों नहीं पूछ सका कि जब IMF पाकिस्तान को पैसा देने से पीछे नही हट रहा तो हम पर यह बेजा दबाव क्यों बनाया जा रहा? कम से कम IMF से मिले पैसे को तो खर्च करवा ही लेना चाहिए था। आखिर जीतने वाले को विराम की इतनी हड़बड़ी क्यों थी? क्या अंतर है पिछली तथाकथित कायर और इस सरकार में। आखिर किया तो आपने भी वही। कब तक हम खून को स्याही से हराते रहेंगे?
कब तक हम अदना से पाकिस्तान की लिखी स्क्रिप्ट पर कठपुतलियों की तरह नाचते रहेंगे????
अंततः जीत अपनी ही हुई
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