ऑपरेशन सिंदूर और सीजफायर के कई दिनों बाद आखिरकार कांग्रेस ने अपना मुंह खोला ही दिया और जैसी उम्मीद थी वैसी ही सस्ती राजनीति का प्रदर्शन पूरी बेशर्मी के साथ किया। सवाल उठना वाजिब है, पूछे भी जाने चाहिए आखिर आप मुख्य विपक्षी दल हैं। लेकिन कैसे कांग्रेस सीधे सीधे विदेश मंत्री पर इतने घटिया आरोप लगा सकती है कि उन्होंने पहले ही आतंकियों पर हमले की सूचना पाकिस्तान को दे दी। वो कैसे शब्दों को तोड़ मरोड़ कर इतने गंभीर मुद्दे पर ऐसी सस्ती राजनीति पर उतर आए है देखना दुखद है। ये वही लोग हैं जिन्होंने कश्मीर पर पाकिस्तान के कब्जे को बना रहने दिया, आतंकवाद पर हमेशा घुटनाटेक नीति अपनाई जिससे मुस्लिम तुष्टिकरण किया जा सके। न जाने कितनी लाशों पर चुप रहे, यहां तक कि संसद पर हमला होने पर भी मुँह में दही जमा कर बैठे रहे। आज भारत की कार्यवाही से बहुत कष्ट में आ गए है ऐसा किस कारण हो रहा है समझना बहुत कठिन नही है। भारतीय सेना के एसेट्स को कितना नुकसान पहुंचा है यह आपको जानना है कि पाकिस्तान को अपना मुंह बचाने की वजह देनी है ये साफ दिख रहा है। यदि नुकसान हुआ भी है तो यह युद्ध का भाग है और जो बड़े बड़े दावे कर रहे है राफेल मार गिराने के वो खुद ही अपनी तीसमारी के सबूत क्यों नहीं दे देते? एक बार फिर से कांग्रेस सबूत मांगने लगी अपनी सरकार और सेना से। इसी कारण आप सत्ता से बाहर हैं और रहेंगे। बेहतर होता सही समय,सही जगह पर सरकार से वो पूछते जो इस देश के हितों को मजबूत करता।
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