सोनम वांगचुक के बहाने से....
जब से प्रसिद्ध जलवायु एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक गिरफ्तार हुए है एक अजीब सी मनःस्थिति हो चली है। एक द्वंद्व में दिमाग उलझ कर रह गया है कि क्या सच मे सोनम वांगचुक पर लगाये जा रहे आरोप सत्य हैं या सरकार की मंशा शक करने योग्य है? गंभीर आरोपों में राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत गिरफ्तारी क्या सिर्फ वांगचुक की राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं को कुचलने के लिए की गई है, क्या कोई भी सरकार पूरी दुनिया की आंखों में धूल झोंक कर बिना किसी ठोस आधार के ऐसा कर सकती है?
इसका जवाब तो वक़्त ही सही दे पाएगा लेकिन वांगचुक के आंदोलन, लद्धाख की वो स्थितियां जिन्हें मुद्दा बनाने का प्रयास किया जा रहा है, लद्धाख की भूसामरिक स्थिति और विदेशी हितों के सम्यक अध्ययन के बिना सतही आधार पर किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा। जैसा कि हम इस मामले में सोशल मीडिया में वांगचुक के समर्थन में देख सकते है। लेकिन यह प्रश्न भी महत्वपूर्ण है कि क्या वांगचुक का समर्थन करने वाली सोशल मीडिया भीड़ और आंदोलन में जमा तथाकथित जेन ज़ी जिन्होंने हाल में ही बांग्लादेश और नेपाल को बर्बाद किया है वास्तव में लद्धाख के हितों की बात कर रहें है? या यह सिर्फ एक दिखावा है किसी गहरी साजिश को छुपाने के लिए।
कुछ बातें समझ से परे हैं जैसे कि वांगचुक और उनके समर्थक लोगो को निरंतर भड़काते रहे केंद्र द्वारा बनाई जा रही एक बिजली परियोजना के विरुद्ध, उनका कहना था कि यह लद्दाख के पर्यावरण को हानि पहुँचायेगा और तो और स्थानीय चरवाहों को भी समस्या होगी। बात स्थानीय गरीब चरवाहों को तो आकर्षक लग सकती है लेकिन क्या यह प्रश्न वाजिब नहीं है कि क्यों कुछ लोग लद्दाख को चरवाह युग से बाहर नहीं आने देना चाहते हैं? लद्दाख में आधारभूत संरचनाओं का अभाव होना किसके हित मे है? यदि आजतक सरकारों द्वारा इस महत्वपूर्ण सीमांत प्रदेश में राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से कोई काम नहीं किया गया तो क्या यह उपेक्षा अनवरत चलनी चाहिए, इसमें किसका लाभ है? संविधान की छठी अनुसूची में लद्दाख को लाने की एक बड़ी मांग बताया जा रहा है, यह राज्य की संस्कृति, संसाधनों को लोगो की भावनाओं के अनुरूप व्यवस्थित करने का एक साधन है, इस पर चर्चा करके रास्ता निकाला जा सकता है। आज जो लोग धारा 370 को बेहतर बता रहे है उनसे कोई ये क्यों नहीं पूछता की तब भी छठी अनुसूची जम्मू और कश्मीर पर लागू नहीं होती थी तो यह झूठा बहाना क्यों खड़ा किया जा रहा है? कुल मिलाकर लद्दाख के ठंडे पठारों में लाया गया यह उबाल अंतर्राष्ट्रीय षड्यंत्र का एक हिस्सा है जिसमें इस सीमांत प्रदेश को भारत की मुख्य भूमि से अलग थलग बनाये रखना उद्देश्य है। लद्दाख में आधारभूत संरचनाओं का विकास विदेशी हितों के विरुद्ध है इसलिए यह आंदोलन खड़ा किया जा रहा है। जिससे बकरी चराने वाले बकरी ही चराते रहें और षड्यंत्रकारियों की दया पर भारत की सुरक्षा अवलंबित रहे। राहुल गांधी और सोनम वांगचुक अपनी महत्वाकांक्षा के मारे हुए वो चेहरे हैं जो लगातार झूठ बोल रहे हैं, लोगो को भड़का कर सड़को पर लाने का प्रयास कर रहें हैं जिससे विदेशों से प्राप्त मूल्य की उपादेयता सिद्ध की जा सके। अंत मे एक प्रश्न एक ही पटकथा के इन दोनों चेहरों से पूछा जाना चाहिए कि आखिर वो कौन सी 4000 किमी भूमि है जो मोदी सरकार के बाद चीन ने हड़पी है? भारतीय भूमि तो चीन के अधिकार में है लेकिन वो इनके ही खानदान के शासन में गई है यह लोगों को याद रखना चाहिए।
इति।
29.09.25
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