देश की राजधानी दिल्ली, दिल्ली का सर्वाधिक ऐतिहासिक कहा जाने वाला स्थल लाल किला, यदि कहा जाये
कि लाल किला दिल्ली का ही नहीं बल्कि देश का हृदय स्थल है तो इसमें कोई
अतिश्योक्ति न होगी. देश के राष्ट्रीय पर्वों गणतंत्र दिवस और स्वतंत्रता दिवस पर
पूरी आन-बान-शान के साथ यही लाल किला हम सबका गौरव प्रतीक तिरंगा के लहराने के साथ
आनन्दित होता नजर आता है. देश के उसी हृदय स्थल लाल किला को एक धमाके के माध्यम से
कलंकित करने का प्रयास किया गया. लाल किला मेट्रो स्टेशन के पास एक कार में बड़ा धमाका
किया गया, जिसमें लगभग दर्जन भर लोगों के मारे जाने की खबर है.
यद्यपि इस हमले को लेकर अभी तक आधिकारिक रूप से पुष्टि नहीं की गई है तथापि इस
कार धमाके को प्रथम दृष्टया आतंकी हमला माना जा रहा है. अभी भले ही आधिकारिक रूप
से पुष्टि न की गई हो किन्तु इस घटना को आतंकी हमला इस कारण से माना जा रहा है क्योंकि
इतनी तीव्रता का धमाका करना सामान्य तौर पर सम्भव नहीं होता है. इस एक सामान्य
कारण के साथ-साथ एक महत्त्वपूर्ण कारण यह भी है कि बीते रविवार को ही जम्मू-कश्मीर
पुलिस ने एक आतंकी नेटवर्क का खुलासा करते हुए कुछ लोगों की गिरफ्तारी अनंतनाग,
शोपियां, गांदरबल, फरीदाबाद से की थी. इन तमाम जगहों से हुई गिरफ्तारियों के द्वारा 2500 किलो विस्फोटक तैयार करने की सामग्री और अन्य
खतरनाक हथियार भी बरामद किए गए थे. इतनी बड़ी मात्रा में बरामद हुई विस्फोटक
सामग्री से स्पष्ट संकेत मिलता है कि देश को दहलाने की, कुछ खूनी कृत्य करने की गहरी साजिश चल
रही थी. इस धमाके के साथ एक और गम्भीर तथ्य यह छिपा है कि इस घटना को इन गिरफ्तारियों
के बाद ही अंजाम दिया गया है.
इस धमाके की घटना के बाद पूरे एनसीआर में हाई अलर्ट लगा दिया गया है. इसके
साथ-साथ गुजरात, कोलकाता, मुंबई आदि जैसे शहरों को भी हाई अलर्ट पर रखा
गया है. आतंक की इस घटना ने आतंक के नए रूप पर ध्यान केंद्रित किया है. गिरफ्तार किए
गए दो लोग डॉक्टर थे और जैश-ए-मुहम्मद और अंसार गज़वा-ए-हिन्द जैसे आतंकी संगठनों से
जुड़े थे. इसमें विशेष
बात ये है कि समाज के बीच वर्षों से रहने वाले ये सफेदपोश आतंकी सुरक्षित और कूटबद्ध
बातचीत के द्वारा पाकिस्तान स्थित अपने आकाओं के निर्देश पर कार्य कर रहे थे. आतंकवाद
की, आतंकियों की गहरी जड़ों की भयावहता का अंदाजा इसी से
लगाया जा सकता है कि इस नेटवर्क का विस्तार उच्च शिक्षित वर्ग, विश्वविद्यालय और अन्य व्यावसायिक वर्गों के
उन लोगों तक है जिन्हें समाज में सफेदपोश माना जाता है. इस तरह की स्थितियाँ
दर्शाती हैं कि वर्तमान दौर में आतंक और आतंकवादी अपना रूप बदल-बदल कर हमारे बीच में
ही उपस्थित हैं. हम सबके बीच रहते हुए, हम सबके साथ घुल-मिल कर अपने खतरनाक इरादों को अंजाम देते रहते हैं. धर्मनिरपेक्षता
के नाम पर पालने वाले ये दहशतगर्द किसी भी रूप में, किसी भी
कीमत पर भारत को बर्बाद करने के लक्ष्य पर डटे हुए हैं. उनकी इस दहशतगर्दी में, उनके इन आतंकी इरादों में क्या डॉक्टर, क्या इंजीनियर, क्या शिक्षित वर्ग, क्या अशिक्षित वर्ग, देखा जाये तो सभी धार्मिक जिहाद की खूनी तलवार लिए आतंकी
ही हैं.
आज के दौर में आतंक एक विश्वव्यापी समस्या है जो प्रत्येक उस देश को झेलनी पड़ रही
है जहाँ इस्लाम है. अब केवल भारत ही नहीं बल्कि यूरोप हो या अमरीका या फिर विश्व
का कोई भी देश, जहाँ इस्लामिक संगठनों ने अपनी उपस्थिति बना रखी है वे सबके सब सभी
इस्लामिक आतंक के निशाने पर हैं. पूरे विश्व के आतंकी संगठन एक हैं और कमोबेश एक ही
प्रकार की तकनीकें और कार्यशैली का प्रयोग करते हैं. यह जानने-समझने के बाद भी दुखद
स्थिति यह है कि इनसे निपटने के लिए दुनिया एक नहीं है.सम्पूर्ण विश्व के इस्लामिक
आतंकवाद के खिलाफ एकजुट न हो पाने का दुष्परिणाम यह है कि आज ये जिहादी मानसिकता
वाले संगठन अमरीका के इस्लामीकरण, भारत के लिए गज़वा-ए-हिन्द जैसे लक्ष्यों पर केन्द्रित हैं, कार्यरत हैं और विडम्बना यह है कि
वे ये सारा काम इन्हीं देशों में रह कर काम कर रहे हैं.
उदारवादी सोच और मानवतावादी कानूनों के सरंक्षण में जिहाद का ये दैत्य हमारी ज़मीन
पर ही हमारे खिलाफ काम कर रहा और सरकारें लाचार हैं. गम्भीर आरोपों में जिन सफेदपोश
आतंकियों की गिरफ्तारी की गई है, कल हमारी ही संसद में उनके समर्थन में अनेक बेशर्म
आवाजें खुलकर उठेंगीं;
उनको निर्दोष बताने वाले हमारे ही राजनैतिक व्यक्ति होंगे; उनके समर्थन में रैलियाँ निकाली जाएँगी; सरकार की मंशा को कठघरे में खड़ा कर दिया
जाएगा. यह सब एक सुनियोजित ढंग से चलाया जाएगा, जिससे सरकार की विश्वसनीयता को ही संदिग्ध
कर दिया जाए. दिल्ली की घटना ये दर्शाती है कि आतंकी संगठन पर्याप्त रूप से मजबूत हैं.
उनके पास न केवल सफेदपोश लोग हैं बल्कि संसाधन भी हैं और सुरक्षा सम्बन्धी रास्ते
भी हैं. यह घटना बताती है कि हमारी सुरक्षा एजेंसियों द्वारा अनेक अवसरों पर ऐसी आतंकी
साजिश को समय रहते नाकाम करने के बाद भी एक चूक कितनी खतरनाक हो सकती है.
फिलहाल, आतंक भी एक युद्ध
है और घात-प्रतिघात इसका हिस्सा है. यहाँ सबक बस यह लेना है कि पूरी ताकत से जिहाद
और आतंक को कुचलने का प्रयास होना चाहिए. इनके समर्थन में उठने वाली हर आवाज को,
हर समर्थन को खत्म किया जाना चाहिए.
आखिर बिना किसी दबाव के, एक देश
के रूप में हमें अपने अस्तित्व की रक्षा का पूरा अधिकार है, इसके लिए भले ही कोई
कीमत क्यों न चुकानी पड़े.
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