सोमवार, 16 जून 2025

ईरान- इज़राइल संघर्ष

 पश्चिम एशिया में इज़राइल और ईरान के मध्य चल रहा विध्वंसक संघर्ष वैश्विक चिंता का विषय है। इज़राइल, ईरान की सैन्य ताकत और परमाणु क्षमता को तबाह करने पर आमादा है। नेतन्याहू साफ कर चुके हैं इस लक्ष्य को प्राप्त किये बगैर वे रुकने वाले नहीं हैं। ईरान अभी तो प्रतिरोध कर रहा है,उसके द्वारा दागी गई हायपरसोनिक मिसाइलों ने तेलअबीव में भयानक तबाही मचाई है। आयरन डोम और सभी प्रतिरक्षा प्रणालियों को ध्वस्त कर ईरान द्वारा इज़राइल पर कुछ सफल हमले किये गए हैं, किंतु ये सफलता इज़राइल पर हावी होने के पर्याप्त नहीं है। ईरान बहुत दिनों तक इज़राइल के हमलों का सामना नहीं कर पायेगा और उसके लिए झुकने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा। इज़राइल पर कुछ सफल हमलों से जिहादी, इस्लामिक संसार मे भले जश्न का माहौल हो पर यह नितांत अस्थाई है।

युद्ध में ऐसे नुकसान होते ही रहते हैं  चाहे दुश्मन कितना भी कमजोर क्यों न हो,वो कभी न कभी नुकसान पहुंचा ही सकता है। इज़राइल की युद्ध क्षमता और इक्षाशक्ति का मुकाबला ईरान नहीं कर सकता।

हाल के भारत-पाक संघर्ष, ईरान- इज़राइल के वर्तमान संघर्ष से युद्ध की रणनीति में आये कुछ परिवर्तनों को स्पष्ट रूप से समझा जा सकता है। पहला ये कि परमाणु ताकत ब्लैकमेल करने की शक्ति खो चुकी है। दूसरा ये कि छद्म युद्ध में मुखौटे के पीछे छुपे राज्य, अब इस तरह से बिना किसी कीमत के युद्ध जारी नहीं रख सकते।भारत हो या इज़रायल दोनों ने ही छद्म युद्ध की आड़ में लड़ रहे राज्य को युद्ध का जिम्मेदार मानते हुए सीधी कार्यवाही करने में संकोच नहीं किया है। सबक साफ है लड़ना है तो मैदान में आओ!! देखते हैं कौन किस पर भारी पड़ेगा?

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें