मंगलवार, 16 दिसंबर 2025

एस आई आर

 पिछले कई दिनों से बी.एल.ओ. और मतदाता पुनरीक्षण का कार्य समाचार में बना हुआ है। कैसे इस पूरी प्रक्रिया में समस्याएं आ रही हैं और इसमें लगे हुए लोगों को कितनी कठनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। फिर भी इस कार्य मे लगे हुए शिक्षक जो बी एल ओ ड्यूटी कर रहें है प्रशंसा के पात्र हैं, जो लगातार काम कर रहें है फील्ड में भी और स्क्रीन पर भी। कुल मिलाकर प्रत्येक व्यक्ति कम से कम 15 घण्टे रोज कार्य कर रहा है। फार्म देना,उन्हे इकट्ठा करना, चौबीस घण्टे फोन पर लोगो को समस्याएं सुनना उसपर सिरफिरे अधिकारियों के सिरफिरे अलिखित आदेशों को मानने का दबाव। तमाम एस आई आर का डाटा अब एकत्र हो चुका है इस कार्य की प्रगति भी संतोषजनक है लेकिन एक अजीब स्थिति प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा पैदा की जा रही है जिसकी गंभीरता का शायद उन्हें अंदाज़ ही नहीं और न ही इस बात की परवाह है कि उनकी बे सिर-पैर की दबाव रणनीति इस पूरी कवायद को बेकार कर देगी। यह समस्या है मतदाता सूची में दर्ज नामों की पारिवारिक सदस्यों से मैपिंग की। कुछ कार्य टारगेट बेसिस पर नहीं हो सकते यह बात अधिकारियों को क्यों नहीं समझ आती? यदि किसी मतदाता की मैपिंग नहीं हो पा रही तो अधिकारियों का अलिखित दबाव है कि किसी के साथ भी ये मैपिंग करके 90 प्रतिशत का लक्ष्य हर हाल में पूरा किया जाए। यहां तक कि जब बी.एल.ओ. ऐसा करने से मना कर रहे है तो उन्हें डराया, अपमानित किया जा रहा है। यहां तक कि उनके मोबाइल फोन से अधिकारियों के अलिखित फरमान के पालन करने के लिए सुपरवाइजर खुद मनमानी मैपिंग कर दे रहें है।

इस देश की एक बहुत बड़ी समस्या नौकरशाही की तानाशाही है। तमाम प्रशासनिक अमले को इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ रहा कि उनकी यह कार्यशैली कितनी समस्याओं को जन्म देगी। इस तरह से तो पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य ही बेकार हो जाएगा। वोटिंग के दिन जो भी गड़बड़ियां सामने आएंगी तो बी.एल.ओ. सीधे सीधे लोगों के निशाने पर आ जाएंगे। बिना किसी अपराध के बेचारे शिक्षक अपराधी बना दिये जायेंगे। मैं सिर्फ इस बात को लेकर ही चिंतित हूँ कि नौकरशाही बिना किसी उत्तरदायित्व के टारगेट बेसिस पर काम को समाप्त कर क्या दिखाना चाहती है कि वो काम खत्म करना जानते हैं भले काम का उद्देश्य इस बीच कहीं खो जाए।

1 टिप्पणी:

  1. चुनाव सम्बन्धी कार्य हमेशा से ही समय की पाबंदियों के साथ संपन्न होता रहा है और किया भी जाता रहा है. विगत वर्षों में बीएलओ स्तर पर जिस तरह से काम होते रहे हैं उसे देखते हुए इस बार शासन-प्रशासन सख्त है. देखने में आया है कि कार्य दुष्कर नहीं है मगर इसे अफवाहों के माध्यम से क्लिष्ट बनाया जा रहा है.
    हालाँकि ऐसे बहुत से लोग होंगे जो अभी तकनीकी तौर पर सहज नहीं होंगे उनका ध्यान रखा जाना चाहिए. ऐसे लोगों पर अनावश्यक दबाव बनाया जाना भी उचित नहीं.

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