रविवार, 8 जून 2025

संक्रियात्मक दक्षता के उच्चतम सोपान पर सैन्य क्षमता

पहलगाम आतंकी हमले के बाद ऑपरेशन सिन्दूर अभियान में पाक अधिकृत कश्मीर और पाकिस्तान में नौ आतंकी ठिकानों को मिसाइल हमलों के द्वारा निशाना बनाया गया. इसमें लश्कर-ए-तोयबा और जैश-ए-मोहम्मद के ठिकानों को भारतीय सेना ने ध्वस्त कर दिया. इसके लिए सेना द्वारा मात्र 24 सटीक, लक्ष्य केन्द्रित और अकाट्य हमले किये गये, जिनको पाकिस्तानी रक्षा प्रणाली द्वारा पहचाना न जा सका तो उनको रोकने का प्रश्न ही नहीं उठता. पाकिस्तान के अवाक्स को भी भारत के हमलों ने बेकार कर दिया. पाकिस्तान की वायु रक्षा प्रणाली, जो चीन से आयातित थी, उसे भारतीय वायु सेना ने पूरी तरह से निष्क्रिय कर दिया. इन अप्रत्याशित हमलों से बौखलाए पाकिस्तान ने भारत के 26 शहरों पर मिसाइल और ड्रोन से हमला करना चाहा लेकिन भारत की वायु रक्षा प्रणाली ने सभी हमलों को हवा में ही असफल कर दिया.

 

इस बार आतंकी हमले का जवाब भारत द्वारा जिस तरह से दिया गया इसका उदाहरण पूरी दुनिया में कहीं भी नहीं मिलता है. पिछले चालीस वर्षों से निरंतर सीमा पार प्रायोजित आतंकवाद में भारत ने लगभग तीस हजार नागरिकों और सैनिकों को खोया है, लेकिन कभी ऐसे जवाब नहीं दिया जैसे इस बार दिया. ऐसा पहली बार हुआ कि भारत ने आतंक का प्रतिकार करने की अपनी प्रतिरक्षात्मक नीति को पूरी तरह पलट दिया. जिसने न सिर्फ महाशक्तियों को बल्कि हमें निरंतर घाव देने वाले पाकिस्तान और उसके आकाओं को भी अचंभित कर दिया. सम्पूर्ण विश्व में यह पहला उदहारण है जब किसी परमाणु शक्ति ने किसी दूसरी परमाणु शक्ति पर सीधा हमला बोला. मात्र 22 मिनट में सीमापार के नौ आतंकी ठिकानों को बिना किसी प्रतिरोध के ध्वस्त करना और एकसाथ पकिस्तान के 11 वायु ठिकानों पर सफल हमला करना भारतीय सैन्य क्षमता की उत्कृष्टता का परिचायक है. अमेरिकी एफ16 फाइटर जेट, चीनी एचक्यू 90, एलवाई 80, एचक्यू16 वायु रक्षा प्रणाली आदि सटीक रणनीति और संक्रियात्मक क्षमता के आगे घुटने टेक गई. भारत ने अंतर्राष्ट्रीय सीमा से सौ किमी अन्दर बहावलपुर आतंकी ठिकाने पर स्कैल्प मिसाइल का सफल हमला करके साबित कर दिया गया सैकड़ों किमी तक ऐसे ही सफल हमले किये जा सकते हैं, जिसका तोड़ पाकिस्तान के पास नहीं है.

 



भारत-पाक संघर्ष के चार दिनों में भारत ने दक्षिण एशिया में अपनी सैनिक सर्वोच्चता के नये मानक खड़े किये. बेहतरीन आक्रामक क्षमता, जीरो टाइम संक्रियात्मक दक्षता, आक्रामक दुस्साहस की भारी-अनपेक्षित कीमत वसूलने की योग्यता ने पाकिस्तान को तो बौना साबित किया ही, चीन के लिए भी स्पष्ट लाल रेखा खींच दी. मिसाइलों की ग्रिड निर्देशांक के एक मीटर के घेरे में सफल, सटीक मारक क्षमता के द्वारा भारत ने सिद्ध किया कि आमने-सामने की लड़ाई के बिना भी वह दुश्मन की कमर तोड़ सकता है. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने स्पष्ट भी किया कि दुनिया के किसी देश को परमाणु ब्लैकमेल की नीति से पहले सौ बार सोचना होगा. भारत ने अपने ‘न्यू नॉर्मल’ घोषित कर दिए है. भारत को अस्थिर करने, घाव देने का कोई भी प्रयास युद्ध होगा और इसका प्रतिकार करने के अपने नैतिक एवं वैधानिक अधिकार से वह पीछे नहीं हटेगा. पाकिस्तानी परमाणु कमान के नजदीक नूर खान एयरबेस पर सफल हमला, किराना हिल्स की घटनाओं और परमाणु विकिरण की अफवाहों आदि से भारत ने स्पष्ट सन्देश दिया कि किसी भी परमाणु हमले के प्रयास को वह दुश्मन की ज़मीन पर ही ख़त्म कर सकता है. यद्यपि परमाणु विकिरण का खंडन किया गया तथापि आनन-फानन में पाकिस्तान का संघर्ष विराम के लिए गिड़गिड़ाना, युद्ध रोकने के पुरजोर वैश्विक प्रयासों को इस सन्दर्भ में देखा जा सकता है. आखिर युद्ध के कोहरे में तमाम तथ्य छुपे रह जाते है जिन्हें कोई पक्ष कभी नहीं स्वीकारता. फ़िलहाल, विदेशमंत्री का कथन ‘करारा जवाब दिया जाएगा’ बहुत कुछ कहता है, भारत की विश्वसनीयता सिद्ध करता है.

 

भारतीय सैन्य क्षमता ने संक्रियात्मक श्रेष्ठता से न सिर्फ रणनीतिक लक्ष्य को प्राप्त किया अपितु भविष्य के लिए परमाणु नीति को भी पुनर्भाषित किया है. सिन्धु जल संधि को स्थगित कर भारत ने दुस्साहस के प्रति साम, दाम, दंड, भेद की नीति को वास्तविकता के धरातल पर उतारा है. आपरेशन सिंदूर के द्वारा भारत ने ग्लोबल साउथ की तकनीकी विपन्नता और सैनिक शक्ति को यूरोप के मुकाबले निम्न माने जाने की धारणा को चूर-चूर कर दिया है. इजराइल और अमेरिका की तरह सटीक हमले कर भारत ने वैश्विक नेतृत्व की ओर ठोस कदम बढ़ाये हैं. विश्व व्यवस्था को नियंत्रित करते बड़े शस्त्र आपूर्तिकर्ता देशों को इस अभियान ने अचंभित कर दिया है.

 

मिसाइल प्रणाली एस400, एंटी-एयरक्राफ्ट गन एल70, बराक, ब्रह्मोस, आकाश मिसाइल, अत्यंत अल्प दूरी की वायु प्रतिरक्षा प्रणाली (वशोराड्स), एआई, उपग्रह आधारित नेविगेशन सिस्टम तथा उन्नत, स्वचालित प्रतिरक्षा प्रणाली आकाशतीर आदि से भारत ने एक अभेद्य प्रतिरक्षा तंत्र बनाया जिसकी तुलना इजराइल के आयरन डोम से की जा रही है. इस तुलना का कारण पश्चिमी सीमा पर पाकिस्तान द्वारा किये ताबड़तोड़ ड्रोन और मिसाइलों हमलों को सेना द्वारा इसी स्वदेशी प्रतिरक्षा प्रणाली द्वारा नाकाम किया जाना है. इस प्रतिरक्षा तंत्र को भारतीय कंपनियों डीआरडीओ, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड, अल्फा डिज़ाइन्स द्वारा तैयार किया गया है. अभियान की सफलता ने शस्त्र निर्माण में भारत की उपलब्धियों का शानदार प्रदर्शन कर मेक इन इंडिया मुहिम को तो मजबूत किया ही साथ ही स्वदेशी हथियारों ने चीनी मिसाइलों और प्रतिरक्षा प्रणाली पर अपनी श्रेष्ठता भी सिद्ध की.

 

स्वदेशी प्रतिरक्षा प्रणाली की सफलता से भारत नवीन संभावनाओं के साथ शस्त्र व्यापार में उपस्थित है. यदि इस क्षेत्र में बड़े पैमाने पर निवेश किया जाए तो चीन, अमेरिका, तुर्किये के एशियाई बाजारों में भारत प्रवेश कर सकता है. उम्मीद है कि भारत शीघ्र ही समस्त बाधाओं को दूर कर हथियार निर्यात की राह पर मजबूत कदम रखेगा. निसंदेह आपरेशन सिन्दूर ने अपने रणनीतिक लक्ष्यों को साधने के साथ-साथ भारत की छवि को अपनी रक्षा करने में सक्षम-समर्थ, आक्रामक किन्तु संतुलित, शक्तिशाली सिद्ध किया है. नेतृत्व ने भी अपनी दूरदर्शिता साबित करते हुए बिना युद्ध में फँसे दुश्मन और पूरे विश्व को स्पष्ट सन्देश दिया है कि हम अब और नहीं सहेंगे, ईंट का जवाब पत्थर से देंगे.


2 टिप्‍पणियां:

  1. बढ़िया आलेख. सारगर्भित और सार्थक जानकारी के साथ. निश्चित रूप से ऑपरेशन सिन्दूर ने भारतीय सेना के और देश के स्वदेशी तंत्र के प्रभावशाली होने का सन्देश भी दुश्मन देशों तक पहुँचाया है. प्रत्येक नागरिक के लिए गौरवशाली.

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    1. धन्यवाद
      आपकी ही प्रेरणा से लेखन हो पाता है।

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