आज ईरान की कतर के अमरीकी बेस पर सीधा हमला कर न सिर्फ अमरीका को चुनौती दी है अपितु मध्य पूर्व के देशों तक युद्ध की आग लगा दी गई है। मध्य पूर्व के देशों में अमरीका के एक दर्जन से भी ज्यादा अड्डे हैं जिनकी सुरक्षा खतरे में आ चुकी है। यह संभावना कम ही मानी जा रही थी ईरान ऐसा कोई कदम उठा सकता है। आज इराक,कुवैत,कतर पर मिसाइलें दाग ईरान दुनिया को यह दिखाना चाह रहा कि वो अमरीका और इज़राइल दोनों को ही मुँह तोड़ जवाब देने में सक्षम है।
लेकिन ईरान के इस कदम ने तमाम मुस्लिम देशों को अपने विरोध में कर लिया है। अमरीकी अड्डे इस पूरे क्षेत्र में बड़ी संख्या में हैं।
इस घटना ने ऐसे सभी देशों संशकित कर दिया जिनकी ज़मीन पर अमरीकी अड्डे हैं।
लेकिन ईरान के पास भी बहुत ज़्यादा विकल्प नही बचे हैं, वो अमरीकी ज़मीन पर हमला नहीं कर सकते इस कारण मध्य पूर्व के अमरीकी अड्डों को निशाना बना रहे हैं। दरअसल सारा मामला फोर्दो परमाणु संयंत्र पर हमले से जुड़ा हुआ है।अमरीका और इज़राइल के हमले में यह जगह पूरी तरह से बर्बाद हो गई,लेकिन ऐसा अंदेशा और खबरे हैं कि हमले से पहले संवर्द्धित यूरेनियम को ईरान द्वारा किसी और स्थान पर स्थानांतरित कर दिया । इस प्रकार हमले का उद्देश्य पूरा नहीं हो सका।
यह संवर्धित यूरेनियम ही ईरान को परमाणु बम तक ले जा सकती है। अब यदि वकाई में ईरान फोर्दो से यूरेनियम बचाने में सफल रहा है तो उसका परमाणु कार्यक्रम अब भी जिंदा है।इस कार्यक्रम को ज़िंदा बनाये रखने के लिए ये ईरान के लिए बहुत आवश्यक हो चुका है कि वह अमरीका को कहीं और उलझाए जिससे उन्हें परमाणु कार्यक्रम को जारी रखने और बम बनाने के लिए कुछ समय मिल जाये।
कतर, कुवैत,इराक के अमरीकी अड्डो पर हमला कर ईरान अमरीका के ध्यान भटकाने,उलझाने की कोशिश कर रहा है।
जब तक ईरान अमरीका प्रतिरोध,प्रतिक्रिया में उलझे रहेंगे ईरान परमाणु सामग्री को सुरक्षित कर आगे कदम बढ़ा सकता है।यदि एक बार वो बम बनाने में सफल हो जाएगा तो स्थितियां स्वयं ईरान के हित मे बदली जा सकती हैं।
लेकिन यदि ईरान ऐसा नहीं कर सका तो कहीं ये घटना भी पर्ल हार्बर हमले की तरह न सिद्ध हो जाये जिसके कारण अमरीका द्वितीय विश्वयुद्ध में कूद गया और 1941 के इस जापानी हमले का बदला अमरीका द्वारा 1945 में जापान पर परमाणु बम गिरा कर लिया गया।
खैर !कल क्या होगा वो ये तय करेगा कि ईरान का कदम सही रहा कि आत्मघाती सिद्ध हुआ।
ईरान का पलटवार करना एक तरह की आत्मघाती स्थिति को तो जन्म देता ही है साथ ही विश्वयुद्ध जैसी आहट को भी पैदा करता है. वर्तमान में अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प जिस तरह से तानाशाह के रूप में काम कर रहे हैं, उसमें ईरान का यह हमला बड़ी आपदा को बुलाने जैसा ही है.
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